फिल्मो मे अक्सर हमने देखा हे की सालो बाद घूमे लोग मिल जाया करते हे, ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला मप्र के राजगढ़ जिले से आया है जहाँ 35 साल बाद वो महिला लौट आयी जिसका परिवार पिंडदान तक कर चुका हे। दरसल महिला को भूलने की बीमारी के कारण 40 की उम्र में वो लापता हो गई थी। घर वालो ने उन्हें 10 साल तक कई जगह तलाश किया। मिल नहीं पाने पर निराश होकर पांच साल पहले प्रयागराज में पिंडदान कर दिया था। वही हर साल श्राद्ध भी कर रहे थे।
क्या हे मामला जानिये
ब्यावरा निवासी 75 वर्षीय गीताबाई सेन 40 की उम्र में अपने मायके शाजापुर के खोकरा गांव से लापता हो गई थीं। दो साल पहले सामाजिक कार्यकर्ता बिंदा बिड़कर ने उन्हें एक पेड़ के नीचे बैठा देखा। उन्होंने महिला को 8 सितंबर 2023 को नागपुर के मेंटल अस्पताल में भर्ती कराया था।
पति हुए भावुक, बेटे की आंखें नम हो गईं
धीरे-धीरे गीताबाई की याददाश्त लौटी। वे नर्सिंग स्टाफ से बातें करने लगीं। उन्होंने नरसिंहगढ़, शुजालपुर और ब्यावरा का जिक्र किया। अस्पताल स्टाफ ने गूगल पर ब्यावरा सर्च किया और पुलिस की मदद से परिजनों तक पहुंचे। 28 मार्च को परिजनों को गीताबाई के मिलने की सूचना मिली। पत्नी को देखकर पति गोपाल सेन भावुक हो गए। बेटे अशोक सेन की आंखें भी नम हो गईं।जब गीताबाईं लापता हो गईं थीं तब उनके चार बच्चे थे, जिनकी उम्र चार से 10 साल के बीच थी। दो की मौत हो गई। उनके 45 वर्षीय बेटे अशोक बताते हैं कि मां मानसिक रूप से कमजोर थीं। मायके से बिना बताए कहीं चली गईं थीं। हमने काफी ढूंढ़ने का प्रयास किया लेकिन कहीं भी पता नहीं चला।
नागपुर से आये फोन से चौके परिजन,फोटो-वीडियो में देखा तो भरोसा नहीं हुआ
सालो बाद जब परिजनो के पास् अचानक पुलिस के माध्यम से नागपुर अस्पताल की सूचना मिली। बेटे ने कहा जैसे ही हमने मां को वीडियो और फोटो में देखा तो हम भरोसा नहीं कर पाए। महिला का बड़ा बेटा मोहन सेन था जिनकी मौत ढाई साल हो चुकी है। अशोक और विनोद सेन दो बेटे हैं जो परिवार के साथ अस्पताल रोड स्थित घर पर रहते हैं। वहीं, एक अन्य बहन श्यामा थीं जिनका निधन पहले ही हो चुका है।
19 माह के प्रयासों के बाद बाद मिले परिजन
नागपुर मेंटल हॉस्पिटल के इंचार्ज कुंडा बिड़कर ने बताया कि 8 सितंबर 2023 को कोर्ट के ऑर्डर पर इन्हें भर्ती कराया गया था। वे डिमेंशिया बीमारी से ग्रसित थीं। मानसिक बीमारी से ग्रसित थीं। हमने खूब पता लगाने की कोशिश की, आधार नहीं था तो बॉयोमैट्रिक किया। लेकिन उसमें भी सफलता नहीं मिली।
गीताबाई की इस कहानी मे कई फिल्मो की तरह मोड भी आये। इंचार्ज ने 19 माह तक इधर-उधर पूछा, महाराष्ट्र, एमपी के कई गांव, पुलिस स्टेशन, सरपंच, किराना दुकानों में पूछा लेकिन नहीं मिली। अभी इसी साल 28 मार्च को बात की तो उसने ब्यावरा और इंदौर बताया, शाजापुर का कुछ बताया। इसके बाद राजगढ़ एसपी ऑफिस में मैंने पता किया। शाजापुर और ब्यावरा थाने की जानकारी ली। वीडियो कॉल पर परिजन से काउंसलिंग की इसके बाद उन्हें नागपुर बुलाया। इसके बाद पहचान हों पायि । इतने वर्षो बाद अपने घर लोटो गीताबाई को पाकर सब खुश हे। बेटे अशोक सेन ने बताया कि हमारी माताजी पिछले 35 साल से हमसे दूर थी। अब वे मिल गई है। हमने उन्हें पहचान लिया है। हमारा पूरा परिवार बहुत खुश है। अब वे हमारे साथ है। ईश्वर का बहुत बहुत धन्यवाद। परिवार् की इस कहानी कोई पिक्चर से कम नही हे।









