यूपीआई के जरिए पेमेंट करने में लगने वाला वक्त 16 जून से 50% कम हो गया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई ने मई में यूपीआई से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव किए थे जो अब लागू हो गए हैं। इसके बाद अब लोगों का पेमेंट अधिकतम 15 सेकंड में पूरा हो जाएगा।
UPI Payment में बदलाव
पहले इसमें मैक्सिमम 30 सेकंड लगते थे। ट्रांजैक्शन रिवर्सल यानी गलत पेमेंट वापस लेना और स्टेटस चेक का टाइम भी 30 सेकंड से घटकर 10 सेकंड हो गया है। पिछले महीने एनपीसीआई ने बैंकों और पेमेंट एप्स को कहा था कि वह अपने सिस्टम को अपग्रेड करें जिसके बाद ट्रांजैक्शन में लगने वाले समय में कमी आने का रास्ता साफ हो गया है। इन टेक्निकल बदलावों में एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस यानी एपीआई से जुड़े चेंज हैं जो असल में पेमेंट को एक से दूसरे बैंक तक पहुंचाने वाले सॉफ्टवेयर सिस्टम हैं। एनपीसीआई चाहता है कि यूज़र्स को और बेहतर एक्सपीरियंस मिले। साथ ही ट्रांजैक्शन फेल होने की शिकायतें भी कम हो जाए। एनपीसीआई ने यह भी अपडेट किया है कि बैंक और पेमेंट ऐप कब और कैसे पेंडिंग या अटके हुए ट्रांजैक्शन चेक कर सकते हैं। पहले ट्रांजैक्शन सफल होने की जांच करने के लिए एप्स को 90 सेकंड तक इंतजार करना पड़ता था। अब वो ट्रांजैक्शन शुरू होने के 45 से 60 सेकंड बाद ही इसे चेक कर सकते हैं। इससे भी ट्रांजैक्शन फेल होने की हालत में कंफ्यूजन कम होगा। तकनीकी बदलावों की जिम्मेदारी केवल एनपीसीआई, बैंक और पेमेंट एप्स को ही करनी थी। लेकिन ग्राहकों को अपने यूपीआई ऐप को अपडेट रखना होगा क्योंकि पुराना ऐप वालों को ट्रांजैक्शन में दिक्कत आने की आशंका है।
UPI करेगा कई बदलाव
यूपीआई के जरिए इस साल कई बार बदलाव किए जाने का प्लान है। योजना के मुताबिक 30 जून 2025 से पेमेंट करने से पहले ग्राहकों को बेनिफिशरी का सही बैंक नाम दिखेगा। इससे फ्रॉड में कमी आएगी। 1 अगस्त 2025 से बैलेंस चेक करने की प्रतिदिन लिमिट 50 बार प्रति ऐप होगी और ऑटो पे ट्रांजैक्शन केवल सात नॉन पीक आवर्स में होंगे। हालांकि इन बदलावों से यूपीआई से जुड़े फ्रॉड को कम करने की कोई योजना नहीं है। लेकिन फास्ट ट्रांजैक्शन और स्टेटस चेक से यूज़र्स को पेमेंट की सही जानकारी जल्दी मिलेगी। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि गलत ट्रांजैक्शन को तुरंत पकड़ने में मदद मिल सकती है।