Indian Railway: भारतीय रेलवे अब 100 साल पुरानी ट्रेन नियंत्रण प्रणाली को पूरी तरह बदलने जा रहा है और यह बदलाव सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्पीड और संचालन के नए युग की शुरुआत है।
रेलवे स्टेशनों पर एडवांस सिग्नल
रेलवे स्टेशनों पर अब रिले-आधारित सिग्नल की जगह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) प्रणाली लागू हो रही है, जिससे संचालन अधिक तेज और भरोसेमंद होगा। वहीं, कवच नामक ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम से रेड सिग्नल या तेज गति की स्थिति में ट्रेनें खुद-ब-खुद रुक जाएंगी हादसों की आशंका को न्यूनतम करते हुए।
भोपाल से होगी शुरुआत
भोपाल डिवीजन से शुरू हुई ऑप्टिकल फाइबर सिग्नलिंग देशभर में फैलेगी, जिससे वायरिंग की गड़बड़ी और सिग्नल फेलियर अतीत बन जाएंगे। साथ ही, एकीकृत कमांड सेंटर और LTE आधारित MTRC कम्युनिकेशन सिस्टम से हर ट्रेन, हर ट्रैक पर नजर रखना आसान होगा।
5सालों में होगा देश कवर
दिल्ली हावड़ा और दिल्ली–मुंबई जैसे व्यस्त मार्गों से शुरू होकर यह क्रांति अगले 5 वर्षों में पूरे देश को कवर करेगी। इसका मतलब है तेज़, सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरता भारतीय रेल नेटवर्क।