Adhar Card New Rule: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) अब आधार कार्ड से जुड़ी धोखाधड़ी को रोकने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। आधुनिक दौर की चुनौतियों से निपटने के लिए UIDAI ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाने की योजना बनाई है।इस पहल का मुख्य उद्देश्य नकली आधार कार्ड और गलत जानकारियों के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी को रोकना है। UIDAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के अनुसार, अब एजेंसी आधार डाटा में बार-बार किए जा रहे बदलावों पर नजर रखेगीखासकर जन्म तिथि और बायोमेट्रिक जानकारी को लेकर।
गलत पहचान पर लगेगी लगाम
कई लोग अपनी पहचान छुपाने या किसी लाभ को पाने के लिए आधार में जानकारियां बदलते रहते हैं। कुछ मामलों में लोग अपने फिंगरप्रिंट में दूसरों के या मृत व्यक्तियों के निशान भी मिला देते हैं। ऐसे धोखेबाजों की पहचान अब AI और ML टूल्स की मदद से की जाएगी।
पूरी तरह डिजिटल होगी आवेदन प्रक्रिया
UIDAI अब आधार कार्ड आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसका लाभ यह होगा कि दस्तावेजों में छेड़छाड़ की संभावना कम हो जाएगी। साथ ही एजेंसी अब सभी जानकारियों की पुष्टि सीधे संबंधित विभागों से करेगीजैसे पैन कार्ड विभाग, मनरेगा डाटा या CBSE से।
बच्चों के आधार का गलत इस्तेमाल भी होगा बंद
एजेंसी को कई ऐसे मामले मिले हैं जहां लोग बच्चों के लिए निर्धारित आधार कार्ड का दुरुपयोग कर रहे हैं क्योंकि बच्चों के आधार में बायोमेट्रिक अनिवार्य नहीं होता। इसे रोकने के लिए अब AI आधारित कैमरों का उपयोग किया जाएगा, जो ऐसे मामलों की पहचान करने में मदद करेंगे।
उम्र बदलकर फर्जीवाड़ा करने वालों पर नजर
बहुत से लोग खेल टीम में चयन या नौकरी के लिए अपनी उम्र कम या ज्यादा दिखाकर जन्म प्रमाण पत्र बदलते हैं और UIDAI में बार-बार जन्मतिथि अपडेट कराते हैं। अब इन गतिविधियों पर सख्त नजर रखी जाएगी और तकनीक के जरिए इनकी पहचान की जाएगी।
विदेशी नागरिकों की निगरानी बढ़ी
UIDAI के अनुसार, केवल वे विदेशी नागरिक जो कम से कम 180 दिनों तक भारत में रह चुके हैं, उन्हें ही आधार के लिए आवेदन की अनुमति है। लेकिन हाल ही में UIDAI ने ऐसे 10,456 आवेदनों को खारिज किया है जो इस शर्त पर खरे नहीं उतरे।
1.17 करोड़ मृतकों के आधार कार्ड रद्द
एक और बड़ा कदम उठाते हुए UIDAI ने पिछले कुछ महीनों में 1 करोड़ 17 लाख से अधिक ऐसे आधार कार्ड रद्द किए हैं जो मृत लोगों के नाम पर बने हुए थे। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उनके परिवार वालों ने समय पर आधार रद्द कराने का आवेदन नहीं किया था।
डिजिटल पहचान को मिलेगी नई मजबूती
UIDAI की यह नई तकनीकी रणनीति न केवल आधार से जुड़ी सुरक्षा को मजबूत करेगी बल्कि देश की डिजिटल पहचान प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाएगी। तकनीक के साथ उठाए गए यह कदम भारत को एक सुरक्षित डिजिटल भविष्य की ओर ले जा रहे हैं।