(दमोह) फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट ने ईलाज के नाम 7 लोगो को सुला दी मौत की नींद ऐसे हुआ खुलासा…

दमोह के मिशन अस्पताल में फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट के इलाज से 7 से ज्यादा मौतों के आरोपी डॉ पर करीब आधा दर्जन से ज्यादा सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज/आज दिल्ली से दमोह पहुंचेगी मानवाधिकार आयोग की टीम मामले में करेगी जांच मध्य प्रदेश के दमोह ...

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(दमोह) फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट ने ईलाज के नाम 7 लोगो को सुला दी मौत की नींद ऐसे हुआ खुलासा...

दमोह के मिशन अस्पताल में फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट के इलाज से 7 से ज्यादा मौतों के आरोपी डॉ पर करीब आधा दर्जन से ज्यादा सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज/आज दिल्ली से दमोह पहुंचेगी मानवाधिकार आयोग की टीम मामले में करेगी जांच

मध्य प्रदेश के दमोह जिले की मिशनरी संस्थान के मिशन अस्पताल में फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट डॉ नरेंद्र जॉन केम के खिलाफ मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी मुकेश कुमार जैन ने बीती देर रात करीब 12:00 बजे सिटी कोतवाली थाना पहुंचकर आरोपी डॉक्टर पर इलाज के दौरान मरीजों की मौत होने के आरोपों में करीब आधा दर्जन से ज्यादा सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कराया है

फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर के द्वारा मिशन अस्पताल में हुई मौतों के मामले में फरवरी माह में शिकायत प्राप्त होने के बाद कलेक्टर द्वारा अप्रैल में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में मिशन हॉस्पिटल में हुई मौतों के मामले में जॉच दल गठित किया गया था और जांच के दौरान टीम ने पाया कि आरोपी डॉक्टर द्वारा मरीजों की एंजियोग्राफी एवं एंजियोप्लास्टी करने से मौत हुई है, मामले में जब जांच करने पहुंची तो आरोपी डॉक्टर नरेंद्र जॉन के मौके से फरार हो चुका था, फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट डॉ नरेंद्र जॉन कम द्वारा कोर्ट रचित दस्तावेज तैयार किए गए थे जिसमें स्टेट मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन क्रमांक 15342, इंडियन मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन क्रमांक 15608, जर्मन मेडिकल काउंसिल क्रमांक, Lphi 768934/324 से फर्जी मेडिकल रजिस्ट्रेशन तैयार किए गए थे ।।

फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर नरेंद्र जॉन कैम पिता अमरेंद्र कुमार, 7 शक्ति एनक्लवे जेम्स मार्ग देहरादून, देहरादून, उत्तराखंड-248001 का निवासी हैं, जिसके द्वारा भारत में कई जगह पर कुटरचित दस्तावेज एवं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इलाज के आरोप लगे हैं, सूत्रों की माने तो फर्जी डॉक्टर पर यहां तक आरोप लगे हैं कि छत्तीसगढ़ के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की मौत भी इसी डॉक्टर के ईलाज की वजह से हुई थी जिनको 20 अगस्त 2006 को तबीयत बिगड़ने के बाद छत्तीसगढ़ के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था जिनका ऑपरेशन इसी आरोपी डॉक्टर नरेंद्र जॉन केम ने किया था, विधानसभा अध्यक्ष की मौत के बाद हंगामा होने पर इसके दस्तावेजों की जांच कराई गई थी जिसमें इसके सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए थे ।

सिटी कोतवाली थाना में देर रात पहुंचे मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी मुकेश जैन से जब मीडिया ने बात करनी चाही तो वह मीडिया से बचते हुए नजर आए तो, जबकि पूरे मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंका कानून को द्वारा 4 अप्रैल को संबंधित मामले में सोशल मीडिया x पर पोस्ट किया था जिसके बाद मामला मीडिया की सुर्खियों में आया था, वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंका कानून को द्वारा बीती देर रात करीब 12:30 बजे सोशल मीडिया एक्पर टी पोस्ट करते हुए एक दो सेकंड का वीडियो भी शेयर किया है जिसमें मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी और मिशनरी संस्थान की मिली भगत होने का आरोप लगाया है ।।

वहीं फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर के मौत का मामले अब राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो चुकी जिसके चलते मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से जवाब मांगते हुए लिखा है कि आरोपी डॉक्टर के संबंध में यह बताएंगे कि आरोपी फ्राड डॉक्टर के लिए दमोह मिशन अस्पताल में हार्ट सर्जरी के लिए किस संस्थान ने सिफारिश की थी ।।

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