Delhi Old Vehicle Rule: दिल्ली में सिर्फ 10,000 देकर गाड़ी वापस जब्त गाड़ियों का नियम क्या कहता है। जाने सरकार के यूटर्न का पूरा सच। दिल्ली सरकार ने हाल ही में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों की जब्ती को लेकर बड़ा यूटर्न लिया।
1 जुलाई 2025 नियम लागू
पहले इस नियम को 1 जुलाई 2025 से सख्ती से लागू किया गया। जिसके तहत पुरानी गाड़ियों को ना केवल जब्त किया जा रहा था बल्कि उन्हें पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से भी रोका गया। इस कदम की भारी आलोचना हुई खासकर उन लोगों की ओर से जिन्होंने महंगी गाड़ियां जैसे कि Mercedes और BMW वर्षों पहले खरीदी और आज भी चलने की हालत में थी। हालांकि अब सरकार ने इस नियम पर अस्थाई रोक लगा दी है।
पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने किया साफ
पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह साफ किया कि यह नियम 1 नवंबर से अब लागू होना है ताकि इसे पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय में लागू किया जाए।
कैसे मिलेगी गाड़ी वापस सिर्फ ₹10,000 में
जानकारों के अनुसार दिल्ली सरकार ने एक सर्कुलर जारी किया जिसमें जब्त की गई गाड़ियों को छुड़वाने की प्रक्रिया बताई गई। यह प्रक्रिया है। सबसे पहला एफिडेविट देना होगा। पहले गाड़ी मालिक को एफिडेविट देना होगा जिसमें यह लिखा होगा कि वे अपनी गाड़ी को दिल्ली से बाहर ले जाएंगे और उसे दोबारा कभी दिल्ली में नहीं चलाएंगे। ₹10,000 का चालान। गाड़ी छुड़वाने के लिए ₹10,000 का चालान भरना होगा। परिवहन विभाग का खर्च चुकाना। जब्ती के दौरान परिवहन विभाग ने जो भी खर्च किया जैसे टोइंग या पार्किंग वो राशि भी गाड़ी मालिक को अदा करनी होगी। इन तीन शर्तों को पूरा करने के बाद गाड़ी को सराय काले खान की पांच नंबर स्क्रैप पिट से छुड़ाया जा सकता है। जहां फिलहाल इन गाड़ियों को रखा गया।
गाड़ी वापिस कब मिलेगी
पूर्व डिपुटी कमिश्नर अनिल शिकारा के अनुसार गाड़ी वापस मिल सकती है, लेकिन शर्तें माननी होंगी। खासकर यह गाड़ी दोबारा दिल्ली में ना चलें। कब तक ले सकते हैं गाड़ियों को वापस? यह राहत अस्थाई है। गाड़ियों को 1 नवंबर से पहले छुड़वाना होगा क्योंकि पर्यावरण मंत्री के अनुसार तब से यह नियम फिर लागू होगा। अगर आपने समय रहते गाड़ी नहीं छुड़वाई तो उसे स्क्रैप में तब्दील कर दिया जाएगा। लोगों को भारी नुकसान। इस पूरे घटनाक्रम से कई लोग परेशान हैं।
कम दामों में गाड़ी बेच रहे लोग
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ लोगों ने मजबूरी में अपनी लाखों की गाड़ियों को बेहद कम दामों में बेचा। कई Mercedes के भी एग्जांपल है। एक व्यक्ति ने तो 85 लाख की कार महज 2.5 लाख में बेच दी। क्योंकि उसे लगा कि अब दिल्ली में उसका उपयोग नहीं होगा। अब सरकार के इस यूटर्न से सवाल यह उठता है कि क्या पहले से लागू नियमों को इतनी जल्दबाजी में लागू करना सही था? और क्या अब लोगों को उस नुकसान की भरपाई मिलेगी? अगर आपकी गाड़ी जब्त हो चुकी है तो आपको जल्द से जल्द एफिडेविट चालान और विभागीय खर्च अदा करके उसे वापस लेना चाहिए। वरना 1 नवंबर के बाद शायद यह मौका ना मिले।









