VS Achuthanandan: केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन का निधन, 101 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

VS Achuthanandan: तिरुवनंतपुरम – केरल से दुखद खबर सामने आई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के सबसे वरिष्ठ कम्युनिस्ट पार्टी नेताओं में शुमार वी.एस. अच्युतानंदन का आज निधन हो गया। वह 101 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमारी से जूझ ...

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VS Achuthanandan: केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन का निधन, 101 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

VS Achuthanandan: तिरुवनंतपुरम – केरल से दुखद खबर सामने आई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के सबसे वरिष्ठ कम्युनिस्ट पार्टी नेताओं में शुमार वी.एस. अच्युतानंदन का आज निधन हो गया। वह 101 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। हाल के वर्षों में वे बिस्तर पर ही थे।

अंतिम दर्शन की व्यवस्था

उनके पार्थिव शरीर को तिरुवनंतपुरम स्थित एकेजी केंद्र में स्थानांतरित किया जाएगा, जहाँ आम जनता उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेगी। मंगलवार को दरबार हॉल में सार्वजनिक दर्शन की व्यवस्था की गई है। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को जुलूस के रूप में अलाप्पुझा ले जाया जाएगा, जहाँ वालिया चुदुकाडु कब्रिस्तान में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

राज्य में शोक की लहर

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन सहित कई बड़े नेता अस्पताल में उनकी स्थिति पर नज़र बनाए हुए थे। अब उनके निधन पर पूरे राज्य में शोक की लहर है। वी.एस. अच्युतानंदन को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।

सिद्धांतों के प्रतीक थे अच्युतानंदन

वे केरल की राजनीति के सबसे बड़े नेताओं में गिने जाते थे। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) के वे संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 1964 में जब 32 लोग CPI से अलग होकर CPIM का गठन कर रहे थे, तब अच्युतानंदन भी उनमें शामिल थे।

संघर्षपूर्ण जीवन की मिसाल

बहुत ही साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले अच्युतानंदन ने अपने माता-पिता को कम उम्र में ही खो दिया था और सातवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बावजूद ट्रेड यूनियन गतिविधियों में सक्रिय रहकर उन्होंने किसानों, मजदूरों और दलितों के हक में संघर्ष किया। उनका पूरा जीवन नैतिकता और सच्चाई की मिसाल बना रहा।

राजनीति में सादगी और ईमानदारी

वे न केवल विपक्षियों, बल्कि अपनी ही पार्टी के लोगों से भी टकराने से नहीं हिचकते थे, अगर बात सैद्धांतिक मूल्यों की होती थी। वे कभी भी भ्रष्टाचार या पैसे के जाल में नहीं फंसे, जिससे उन्हें पूरे राज्य में अपार सम्मान प्राप्त हुआ।

सबसे उम्रदराज मुख्यमंत्री

वर्ष 2006 से 2011 के बीच वे केरल के मुख्यमंत्री रहे। खास बात यह रही कि उन्होंने 82 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री पद संभाला और 93 वर्ष की आयु में 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए राज्य भर में प्रचार करते नजर आए। वे उस उम्र में भी पार्टी के सबसे बड़े स्टार प्रचारक थे।

राजनीति का एक आदर्श चेहरा

वी.एस. अच्युतानंदन का सबसे बड़ा योगदान उनकी उस राजनीति का ब्रांड रहा, जो पूरे राज्य और देशभर में सम्मान से देखा जाता है। उनका सिद्धांतों से भरा जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है।

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