MP News: शहडोल में अधिकारियों के स्वागत में 5 किलो काजू, 6 किलो दूध और 5 किलो शक्कर! आधे घंटे में उड़ गए 19 हजार रुपये

MP News: मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से एक बार फिर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। ये किस्सा सिर्फ काजू, किशमिश और बादाम तक सीमित नहीं, बल्कि सरकारी खर्चों में कैसे हेराफेरी होती है, इसकी एक बानगी भी है। पहले भी पेंट ...

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MP News: शहडोल में अधिकारियों के स्वागत में 5 किलो काजू, 6 किलो दूध और 5 किलो शक्कर! आधे घंटे में उड़ गए 19 हजार रुपये

MP News: मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से एक बार फिर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। ये किस्सा सिर्फ काजू, किशमिश और बादाम तक सीमित नहीं, बल्कि सरकारी खर्चों में कैसे हेराफेरी होती है, इसकी एक बानगी भी है।

पहले भी पेंट घोटाले से मच चुका है हंगामा

कुछ दिन पहले एक खबर आई थी कि पेंटिंग के लिए इस्तेमाल हुए पांच लीटर पेंट पर हज़ारों रुपये का बिल बना दिया गया था। अब एक और मामला सामने आया है जो कि शहडोल जिले के गोपारू जनपद की ग्राम पंचायत बदवाही से जुड़ा हुआ है। यहां ‘जित जल गंगा संवर्धन अभियान’ की समीक्षा के लिए कुछ अधिकारी पहुंचे थे।

आधे घंटे के लिए बना 19 हजार का बिल

अधिकारियों के स्वागत में ग्राम पंचायत ने ऐसा इंतजाम किया कि बिल की रकम सुनकर गांव वाले भी हैरान रह गए। केवल 15–20 मिनट या अधिकतम आधे घंटे के कार्यक्रम में स्वागत के नाम पर 5 किलो काजू (कीमत ₹5000), 5 किलो बादाम (₹6000), 5 किलो किशमिश, 30 किलो नमकीन, 20 बिस्किट के पैकेट, 6 किलो दूध और 5 किलो शक्कर खरीदी गई। कुल खर्च बैठा ₹19000।

क्या वाकई अधिकारी खा गए इतने ड्रायफ्रूट्स

अब सवाल ये उठता है कि क्या एक आदमी एक बार में 5–10 काजू या बादाम से ज्यादा खा सकता है? अगर भूख ज्यादा भी हो तो 50–60 ग्राम से ज्यादा सूखे मेवे खाना मुश्किल है। लेकिन यहां तो अधिकारियों के नाम पर एक साथ हजारों रुपये के ड्रायफ्रूट्स और अन्य सामान खरीद लिए गए, वो भी कुछ ही मिनटों के कार्यक्रम के लिए।

6 किलो दूध में 5 किलो शक्कर कितना मीठा चाहिए

सबसे मजेदार बात यह है कि 6 किलो दूध की चाय बनाने के लिए 5 किलो शक्कर भी खरीदी गई। ऐसे में यह अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं कि यह सरकारी कार्यक्रम था या फिर सरपंच-सचिव के घर की एक महीने की किराने का इंतज़ाम।

भ्रष्टाचार की बानगी बना यह छोटा सा मामला

यह मामला दिखाता है कि किस तरह से सरकारी कामों में 10 गुना तक के बिल बनाए जाते हैं और भ्रष्टाचार खुलेआम होता है। यह मामला भले ही छोटा हो, लेकिन प्रदेशभर में इसे लेकर जगहंसाई हो रही है। सोचने वाली बात यह है कि ऐसे और कितने मामले हैं जो सामने नहीं आ पाते, जिनके बिल कभी उजागर नहीं होते।

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