MP News: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में वन विभाग से जुड़ा एक हाई वोल्टेज मामला सामने आया है। जहां डिप्टी रेंजर हरगोविंद मिश्रा को उनके रिटायरमेंट के दिन ही बर्खास्त कर दिया गया। सुबह कार्यालय में उन्हें भावनी विदाई दी गई। लेकिन दोपहर होते ही उन्हें सेवा से हटाने का आदेश थमा दिया गया।
क्या हैं पूरा मामला
दरअसल मामला बानापुरा के इको सिस्टम इंप्रूवमेंट प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है। विभागीय जांच में सामने आया कि भ्रमण कार्यक्रम में फर्जी बिल लगाकर मिश्रा ने करीब ₹18 लाख का गमन किया था। इस परियोजना के तहत 150 लोगों को महाराष्ट्र के शिरडी और राेगढ़ सिद्धि भ्रमण पर ले जाने की योजना बनाई थी। लेकिन केवल कुछ लोग ही भ्रमण पर गए और शेष के नाम पर फर्जी बिल लगाकर राशि निकाली गई। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि जिन खातों में रकम जमा हुई उनमें कुछ खाती मिश्रा के परिवारजनों के नाम पर हैं। अनियमितताओं की शिकायत सेवानिवत्त फॉरेस्ट अधिकारी और वन कर्मचारी संघ के संरक्षक मधुकर चतुर्वेदी ने की थी। इसके बाद विभाग ने डिप्टी रेंजेंजर से स्पष्टीकरण मांगा लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक यानी कि सीसीएफ अशोक कुमार चौहान ने आर्थिक अनियमितता प्रमाणित होने पर मिश्रा को सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
वन विभाग की कारवाही
इसी मामले में उस समय के डीएफओ अंजय पांडे भी जांच के दायरे में हैं। वे भी 30 जून को सेवानिवत्त हुए हैं। लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई कारवाही नहीं हुई। वन विभाग में इस कार्यवाही को लेकर चर्चा का माहौल है क्योंकि एक ओर विदाई की मिठाई बांटी जा रही थी तो दूसरी ओर आदेश पत्र में बर्खास्तगी की स्याही सूख रही थी। एक काफी पुराना मामला था जिसमें डिप्टी रेंजर को रिटायरमेंट के दिन बर्खास्त किया गया है और डीएफओ जो थे तत्कालीन डीएफओ वह सीसीएफ पद से रिटायर हुए हैं। इस भ्रष्टाचार में ईएसआईपी के अंतर्गत एक टूर प्रोग्राम बनाया गया जिसकी कोई अनुमति जुलाई के महीने में नहीं थी। किंतु इन लोगों ने एक प्रोग्राम बना के विधिवत हरगोविंद मिश्रा की कप्तानी में इसको महाराष्ट्र में रागंज सिद्धि में भेजा गया था।









