कुंवारी बेटियों के लिए राहत की खबर हाई कोर्ट की तरफ से एक ऐतिहासिक फैसला

जिन लड़कियों की शादी नहीं हुई है, उनके लिए हाई कोर्ट की तरफ से एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया है जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। अगर आपके परिवार में भी कोई कुंवारी लड़की है, तो यह खबर जानना बेहद जरूरी है।भारत में ...

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कुंवारी बेटियों के लिए राहत की खबर हाई कोर्ट की तरफ से एक ऐतिहासिक फैसला

जिन लड़कियों की शादी नहीं हुई है, उनके लिए हाई कोर्ट की तरफ से एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया है जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। अगर आपके परिवार में भी कोई कुंवारी लड़की है, तो यह खबर जानना बेहद जरूरी है।भारत में कानून के मुताबिक 18 साल से पहले शादी नहीं हो सकती। ऐसे में जो लड़कियां नाबालिग हैं, उनके लिए पहले से ही भरण-पोषण का नियम लागू है।

बड़ी उम्र की बेटियों पर भी लागू होगा ये नया फैसला

अब चाहे लड़की की उम्र 20, 22 या 25 साल भी क्यों न हो और अगर वह अब तक अविवाहित है, तो उस पर भी यह नया आदेश और अधिकार लागू होगा।दूसरी ओर, हिंदू आचार संहिता में भी बदलाव किए जा रहे हैं  जिसमें दहेज पर रोक, मृत्यु भोज में केवल 13 लोगों की सीमा और शादियों में फिजूलखर्ची को नियंत्रित करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।

अक्टूबर 2025 में आएगी नई हिंदू आचार संहिता

हिंदू समाज के लिए नई आचार संहिता की 356 पेज की एक लाख प्रतियां तैयार की गई हैं, जो अक्टूबर 2025 में सार्वजनिक होंगी।आचार संहिता के अनुसार, अब विवाह में केवल ‘कन्यादान’ मान्य होगा, दहेज नहीं। इसे इस्लामिक विवाह कानून की तर्ज पर हिंदू विवाह कानून की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

हाईकोर्ट का फैसला

हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक अविवाहित बेटी आत्मनिर्भर नहीं हो जाती, तब तक वह अपने माता-पिता से भरण-पोषण की मांग कर सकती है।अब तक सिर्फ नाबालिग या मानसिक/शारीरिक रूप से अक्षम बेटियों को ही भरण-पोषण का अधिकार था। 18 साल के बाद यह अधिकार समाप्त हो जाता था।

कोर्ट ने बढ़ाया अधिकार

अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि बेटी बालिग और अविवाहित है, लेकिन आत्मनिर्भर नहीं है, तो वह भी अपने माता-पिता से गुजारा भत्ता मांग सकती है।इस फैसले को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे उच्च शिक्षा ले रही या बेरोजगार बेटियों को सीधा लाभ मिलेगा।

CRPC की धारा 125 को मिला नया विस्तार

यह फैसला भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के दायरे को व्यापक बनाता है, जो अब फैमिली कोर्ट में भी लागू होगायह फैसला पंजाब के गुरदासपुर की दो बहनों द्वारा दायर याचिका पर आया है, जिसे हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला बताते हुए स्वीकार किया।जस्टिस जसप्रीत सिंह पुरी ने कहा कि जब तक बेटी की शादी नहीं हो जाती या वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो जाती, तब तक वह पिता से भरण-पोषण की हकदार है।

यह फैसला क्यों है खास?

देश भर की सभी अविवाहित लड़कियों के लिए यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनके अधिकारों की रक्षा करता है और आर्थिक आत्मनिर्भरता तक सहायता सुनिश्चित करता है।

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